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बुरे वक्त का सच्चा साथी -एक पिता कहानी

बुरे वक्त का सच्चा साथी एक पिता -

आसपास शांत वातावरण को देखते हुए और किचन की तरफ अपने कदमो को बढ़ाते हुए अपनी डगमग  हुई आवाज के साथ हौले से नीतीश ने अपनी अम्मा से कहा
"आपके पास कितना रुपया है"
उस समय अम्मा खाना बनाते हुए और एक नजर से नीतीश को देखते हुए मजाक में कहा
"अच्छा मांग तोहार को कितना रुपया चाहिए "
नीतीश ने नजरों को झुकाते हुए कहा बाबूजी को नहीं बोलेगा  कि हम तनिक पैसा लिया है।"
यह बात सुनने के बाद अम्मा अचंभा होती बोली:-"नहीं बोलेंगे, बस चल मांग कितना चाहिए।"
नीतीश ने धीरे से कहा:-"₹500 रुपया।"





यह बात सुनने के बाद अम्मा बोली
"अरे इतना सारा पैसा काहे चाहिए तोहार बापू जी से ही मांग ले वरना वैसा भी दिवाली आ रहा है दिवाली के दिन तोहर को मिल जाएगा "
यह बात सुनने के बाद नीतीश ने रुहासा शक्ल बनाकर गिड़गिड़ाते हुए अम्मा से कहा:-"नहीं, हमें आज ही चाहिए और चलिए जितना हो उतना ही दे दीजिए।"
यह बात सुनते हुए अम्मा ने उसे ₹500 दे दिए।
एक या 2 दिन बाद फिर से नीतीश ने कहा :-
"अम्मा और पैसा है क्या
, बहुत जरूरी काम आ गया है। "
अम्मा ने फिर पूछा:-" कितना चाहिए।"
नीतीश ने कहा:-" 200 रुपिया।"
अम्मा ने पैसे दे दिए लेकिन  पूरी तरह से दिन भी नहीं ढला था कि नीतीश कुछ घंटों बाद फिर पैसा मांगने आ गया।
इस बार अम्मा का सब्र टूट चुका था आखिर अम्मा ने पूछ लिया " काहे चाहे तोहार को इतना सारा पैसा"
आखिर बहुत कुछ पूछने पर भी नीतीश ने कुछ नहीं बताया और सुबह उठते ही बाबूजी बिस्तर पर पहले ही बैठे थे बाबूजी ने नीतीश को अपने पास बुलाया और कहा " कितना पैसा चाहिए, तोहार को"

यह बात सुनने के बाद नीतीश रोने बैठ गया और रोते हुए  उसने कहा :-" हमें लगा कि हम पैसा के बात करेंगे तो आप हम पर नाराज होगा, दरअसल हम एक शख्स से दोस्ती करने का बाद उसकी मदद की खातिर उसके खाते में हम 5000 रुपए डलवा दिया और अब वह देने से आनाकानी कर रहा है और एक प्रतियोगिता में भाग लेने के खातिर हमार को 10000 रुपया का जरूरत है। इस जरूरत को पूरा करने की खातिर हम दोस्तों से भी उधार ले लिया, आजकल मोबाइल लोन इससे हम उनके द्वारा भी छोटा-मोटा लोन ले सकते हैं, फिर बाद में उसको इंटरेस्ट के साथ लौटाना  पड़ता है उसका भी तारीख आ रहा है हम इन सब में बुरी तरह से फंस चुका है।"
यह बात सुनते हुए बाबू जी ने कहा:-
"देखिए मुन्ना, यह उम्र का फासला होता ही ऐसा है इसमें बच्चा लोग सारी समस्या और छोटी-मोटी बातें दूसरा तक बता नहीं पाते हैं और इसी वजह से बाद में और बड़ी समस्या में फंस जाते हैं "
बाबूजी ने अचानक से खड़े होकर  कहा
"देखिए हम तुम्हारा मां बापू है हम तुम्हारी गलती पर तुम को डांट सकता है लेकिन सबसे पहले  उस गलती को सही करने और तुम्हें समस्या से बाहर निकलने का जिम्मेदारी भी हमारे ऊपर ही है ,तो कभी भी किसी समस्या में फंस जाओ, सबसे पहले अपने मां बापू के पास आ जाना"
इतना कहने के बाद बाबूजी ने बिना और किसी चर्चा करे, बस अलमारी से 15000 निकालकर नितेश के हाथों में थमा दिए और कहा यह ले प्रतियोगिता में भाग ले लेना और जिससे जितना पैसा लिया है उतना  उसे दे देना और बाकी का तोहारी दिवाली की खर्ची है "
उस दिन के बाद नीतीश की नज़रों में बाबूजी की इज्जत और बढ़ गई ।

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