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Hindi poem on life | जिंदगी पर आधारित कविता

जिंदगी कुछ इस तरह की हैं 

Hindi poem on life | जिंदगी पर आधारित कविता
Hindi poem on life
कुछ राज छुपे रहने भी चाहिए
अल्फाज कम कहने भी चाहिए
आंसू  गम में बहने भी चाहिए
हर ऐशो आराम नही कुछ
तकलीफे सहने भी चाहिए
कुछ अपने तो कुछ पराये लगने भी चाहिए
उम्र बढ़ने लग जाती हैं
तो जिंदगी धढने लग जाती हैं
आँख बंद होने पर अंधरा हो जाता है
तो आँख खुलने पर सवेरा हो जाता हैं
वक्त और अपने हो तो इंसान घुघरू वाली पायल हो जाता है
तो सब कुछ जाने पर दिल जख्मों से घायल हो जाता हैं
इंसान को अकेला चलना पड़ता हैं
इंसान को कभी खुद से लड़ना पड़ता हैं
कभी आसमान में खो जाता हैं
तो कभी जमीन की मिटीं हो जाता हैं
जिंदगी में किसी का इंतजार करता हैं
कभी तो खुद से ही बेपनाह प्यार करता हैं
जिंदगी में कभी खुद पर रोता है
तो दूसरे के गिर जाने पर खुश होता हैं

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