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" झूठ " sad short story in hindi

एक बेटे के झूठ की कहानी 


कभी खुलती कभी बंद आंखें लेकिन कमजोर बढ़ती उम्र के चलते हुए एक बुजुर्ग औरत किसी के आने का  बेसब्री से इंतजार कर रही थी आसपास के सन्नाटे को चीरती हुई एक आवाज उस बुजुर्ग महिला के कानों तक पहुंची
 "दादी दादी हैप्पी बर्थडे दादी।"

 " झूठ " sad short story in hindi
 " झूठ " short story in hindi
यह सुनकर उस बुजुर्ग महिला से आवाज आई
 "अरे मेरा राजकुमार यह ले खर्ची, मेरी तरफ से।"
तभी जैसे ही उस महिला ने अपने नजर घुमाई और कहा:- "अरे पंकज! कहां जा रहा है तू।"
तभी पंकज ने कहा:- "मां मैं बाहर जा रहा हूं। बहुत जरूरी काम आ गया है, एक क्लाइंट से अभी मीटिंग करनी पड़ेगी।"

यह सुनकर  मां ने कहां:- "चल ठीक है मैं तेरा खाना बनाकर रख दूंगी।"
 यह सुनकर पंकज ने कहा
"नहीं, मां मैं वहीं पर खाना खा लूंगा देरी हो रही है मैं निकलता हूं।"
इतना कहते हुए पंकज वहां से चला गया। लेकिन मां की नजरें खुले दरवाजे की तरफ ही थी।
तभी अचानक से रागिनी ने आवाज लगाई:-
 "माजी अभी सुमन का फोन आया था। उसकी तबीयत खराब है मुझे उसके घर जाना पड़ेगा मैं जल्दी ही आ जाऊंगी, और बंटी तुम भी मेरे साथ आ जाओ।"

यह कहकर रागिनी भी जाने ही वाली थी। तभी बंटी रोने बैठ गया। तभी दादी ने बंटी से पूछा:-
"अरे! क्या हुआ, क्यों रो रहा है मेरा राजकुमार।"
यह सुनकर बंटी ने कहा:- "दादी, आज मम्मी और पापा ने कहा था कि आज हम जिसे रेस्टोरेंट जाएंगे और वहीं पर खाना खाएंगे और अभी कोई नहीं चल रहा है।"
यह सब सुनकर रागिनी की गर्दन झुक झुकी थी और घर के बाहर पंकज वह भी अपने बोले गए झूठ और यह बात छुपाने के लिए शर्मिंदगी महसूस हो रही थी।

शिक्षा:- हमेशा बड़ो की इज़्ज़त करो, उनसे कभी झूठ मत बोलो।

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