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" लालची लोमड़ी का अंत " kids story in hindi

लालची लोमड़ी का अंत की कहानी 


एक जंगल में एक लालची लोमड़ी रहती थी और वह बड़ी कामचोर थी वह दुसरो से माँग माँग  कर खाती थी इसी वजह से वह अक्सर भुखी रहती थी। एक दिन उसने देखा कि सब शिकार कर आये हैं और सब खा रहे हैं लेकिन कोई भी उसको खाने के लिये नही दे रहा हैं सब से थक हार के वह लोमड़ी अपनी दोस्त के पास गई तब उसकी दोस्त ने कहा :- "आज मै तुझे  खाने के लिये नहीं दूँगी।"
यह सुन उस लोमडी ने कहा:- "ऐसा मत करो , आज दे दो कल मैं जब शिकार को जाऊँगी तो तुम्हे भी खाने को दे दूँगी।"

 लालची लोमड़ी का अंत
 लालची लोमड़ी का अंत

तब उसकी दोस्त ने कहा :- "तुम हर रोज यही कहती हो, और कल कियू आज ही शिकार पर जाओ।"
आखिर उसे शिकार के लिये जाना पड़ा, लेकिन आलसी होने के वजह से वह शिकार कर नही पाई।
एक दिन वो जंगल मे धूम रही थीं, तभी उसे एक मेमना मिला तब उसे एक उपाय आया। वह फट से उसके पास गई औऱ मीठी मीठी बातें कर उस से दोस्ती कर ली। तभी थोड़ी देर बाद उसने कहाँ :-"अरे तुम इतनी बड़े जंगल मे अकेले घूम रहे हो यहाँ सब जंगली जानवर रहते हैं भाग जाओ वरना कोई तुम्हें मार देगा।"
तब मेंमने ने हँस कर बोला :- "मैं अकेला कहाँ हूँ मेरे पास तो सभी मेमने की टोली हैं।"

यह सुन उस लोमड़ी को लालच आ गया उसने फिर कहा :-
"मैं तो बहुत ही अच्छी हूँ मैं किसे भी नही मरती हूँ।"
यह सुन उस छोटे मेमने ने कहा:-चलो ठीक है अब मै चलता हूँ तभी उस लोमड़ी ने कहा :-
"अरे नही, इतना बड़ा जंगल हैं मैं तुम्हे तुम्हारे इलाके तक छोड़ देता हूँ।"
मेमना इस बात के लिये तैयार हो गया। फिर उस इलाके को देख उस लोमड़ी ने कहा :-
"वाह, यह बहुत अच्छी जगह हैं मै भी यहाँ रह सकती हूँ।"
यह सुन उस मेमने ने कहा :-
"हाँ मित्र तुम यहाँ रह सकती हो।"

 लेकिन फिर अचानक उस इलाके से रोज मेमने कम होने लग गए थे और उस लोमड़ी भी हटी कटी होने लग गई थीं तब उस मेमने को लोमड़ी पर शक हुआ। एक दिन उस मेमने ने लोमड़ी की जगह की तलाशी करी तो कुछ हड्डियां मिली। जिस से उस का शक यकीन में बदल गया। तभी लोमड़ी वहाँ आ गई यह देख मेमना वहाँ से भाग निकला और लोमड़ी उसका पीछा कर रही थी। तभी मेंमने को एक उपाय आया वह नदी के तट पर रुक गया और अपनी परछाई को दिखाते हुए उसने लोमड़ी को कहा :-"मैं यहाँ अकेला नही आया हूँ मेरा एक साथी इस नदी में हैं।"

लालची लोमडी लालच में आ कर नदी में कूद गई उस मेमने को खाने के लिये लेकिन वह तो बस मेमने की परछाई थी। अतः मोटी होने के वजह से वह नदी में तैर नही पाई और नदी में डुब गई तो ऐसे मेंमने ने खुद को बचाया और लोमड़ी से बदला ले लिया।

सीख:- किसी पर भी आँख बंद कर विश्वास न करें।

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