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मेरी प्यारी बिटिया कविता

मेरी प्यारी बिटिया :-


मेरी बिटिया और मैं
मेरी बिटिया को अपने बचपन के पुराने खिलौनों से बहुत प्यार हैं ,
अपने सपनों के राजकुमार से वो मिलने के लिए वो बहुत ही बेताब हैं
  डर लगता है कि हमारे जाने के बाद उसको अकेले ही इस जहां को ही अपना समझ लेना है
 इसका हाथ मुझे किसी और को देना  हैं




इसके नन्हे हाथों से खाना बनाने पर पूरा घर खुशबू से महक जाता है
1 दिन विदा हो जाएगी वह यहां से यह सोच कर ही रोना आ जाता है
भले हमारी उम्र पचपन हैं, बड़ी तो मानो वह हुई ही नहीं हमारे सामने तो अभी भी यह लगता है कि यह उसका बचपन हैं
आज मेरी बिटिया ने बेटी से बहु  और मां का दर्जा भी पाया
 आज उसने  बेटी होकर बहू और मां के प्रेम को समझाया हैं
 आज भी उसकी बातें सुनने के लिए कान तरसते हैं
आज भी बिटिया  के मुख से आज भी प्रेम की बारिश के वह मोती बरसते हैं।
आज उसने भी अपना परिवार बसाया हैं ,
बिटिया पाकर निर्मल प्रेम हमने पाया हैं
उसी के आने से जिंदगी में सावन आया हैं,
 बिटिया पाकर मन भर आया है
उसको देख कर लगता है कि भंवरे ने गीत गाया है
एक छोटा सा प्रेम भरा तोहफा बिटिया  के नाम से पैक कराया हैं,
उसे पाकर लगता है की विवाह के बाद भी वह मेरी बिटिया ही है नहीं वह पराया है
उसकी अद्भुत प्रेम का ना कोई आकार हैं,
 वह सच में बचपन से ही एक बेहतरीन कलाकार हैं।
उनके होने से ही सब साकार हैं।

Image by Mabel Amber, still incognito... from Pixabay

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