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"बीमार" a poem in hindi

"बीमार"


"बीमार" a poem in hindi
"बीमार" a poem in hindi

यहां अंधविश्वास और अंधश्रद्धा का कोई अंधा है
अब तो मजहब भी नहीं बचा वह भी एक धंधा है

इंसानियत सब भूल गए
सीधा सा फंडा है साहब गंगा गए सारे पाप धुल गए

यहां कालाबाजारी धोखाधड़ी अपराध देशद्रोही घूसखोरी जुर्म अत्याचार एक मार है
इन सब बीमारियों के चलते हां हम सब बीमार है

इन सब हमारे लिए मार है
हां इन सब बीमारियों के चलते हम बीमार हैं

जुल्म इतनी सफाई से करते हैं कि पीछे बचता नहीं कोई दाग नहीं है
आजकल के युग के बच्चों में वह क्रांतिकारियों की लगाई हुई वह आग नहीं है

आजकल का युग यह जो नशे में धुत है
इतना कुछ होने के बाद भी शांत खड़े हैं जैसे कोई भूत है

इन सब की एक मार है
हां इन सब के चलते हम बीमार है

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