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इंसानियत पर कविता - हिंदी में

"इंसानियत"

इंसानियत पर कविता - हिंदी में
इंसानियत पर कविता - हिंदी में 

अहंकार और अपने स्वार्थ  को मत चढ़ाओ

किसी की मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाओ

दिल से मदद कर ए बंदे, यह काम आएगा

खुदा तो एक ही है नेकी की राह पर चल खुदा खुद ब खुद खुश हो जाएगा

तेरी वजह से अगर किसी के चेहरे पर खुशी आएगी

तो फिर रब की मेहर से तेरे जोली भी खुशियों से भर जाएगी

यह पहल तब रंग लाएगी

जब इंसान से इंसानियत फिर लौट  आएगी

किसी लाचार किसी प्रकार की मदद ना करने की भूल कर जाएगा

सोच कर देख फिर वह रब तेरी दुआ भी  कैसे वह कबूल कर जाएगा

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