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किसान के दर्द पर कविता हिंदी में

"किसान"


किसान के दर्द पर कविता हिंदी में
किसान के दर्द पर कविता हिंदी में 

अचानक से गई नजर पेड़ों पर तो देखा कि कुछ जिस्म  लटक रहे थे
अचानक से कुछ हुआ ऐसा कि आराम फरमाने वाले अचानक किसी चीज के लिए भटक रहे थे

अब पता चली उनकी अहमियत पहले उन्हें मामूली समझ कर भुला रहे थे
आस पास पड़े हल , फ़ावड़ा , किसी को बुला रहे थे

पैसों की भूख इतनी बढ़ गई और यहां बंजारा जगह देखकर न जाने कितने किसानों की सूली चढ़ गई

जिन हाथों ने अनाज दिया उन हाथों को दो वक्त की रोटी के लिए तरसा रहे थे
जहां हर कोई खुश होकर झूम रहा था वहां यह अपने आंसू बरसा रहे थे

अब हरियाली थी ही कहां अब पंछी नहीं खेतों में गा रहे थे
अब खेतों में खेती करने वाला किसान रहा ही कहां  बचे कुछे  तो शहर जा रहे थे

बंजर जमीन हो गई
बिना हरियाली के किसान की आंखें ही बंद हो गई

बिना खेती के किसान के हाथ ही बर्फ में मानो जम गए
इनके लिए यह करेंगे वह करेंगे इतना कहकर कुछ हाथ अपने आप थम गए

एक किसान जो हमें अनाज देता है
वही खेती ना होने की वजह से आत्महत्या जैसे कदम उठा लेता है

हमें अपनी किसानों के बारे में सोचना चाहिए आज वह तो हमें अनाज देते हैं
बदले में हम उनकी मदद ना कर कर उनके बेबस समय और बंजर जमीन के चलते उनकी जान लेते हैं


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