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"मेरा सफर" a sad poem in hindi

"मेरा सफर"


"मेरा सफर" a sad poem in hindi
"मेरा सफर" a sad poem in hindi

यह सफर सिर्फ तेरा है
इन आंसुओं और दर्द पर हक सिर्फ मेरा है

चिल्लाती रही, गिड़गिड़ाती रही ,लड़ती रही खुद से
 अब जाना चाहती हूं
जीने की तमन्ना नहीं अब मौत को गले लगाना चाहती हूं

खुश थी मैं भले साथ तेरा जितना ही  था
अब मुझे मत रोको क्योंकि मेरा सफर बस इतना ही था

अब बस तमाम आंसुओं को अपनी आंखों में भर दूंगी
अपने रूह को बाहर निकाल अपने जिस्म को विरान कर दूंगी
अपने जिस्म की हर एक खून के कतरे को बहा दूंगी अपनी जिस्म को जला दूंगी
अपने माटी के जिस्म को माटी में मिला दूंगी

अपने दर्द को अपने साथ ले जा रही हूं
ऐ मौत कहीं मत जा तुझसे मिलने मैं आ रही है

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