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"मुस्कुराहट" a beautiful poem in hindi

"मुस्कुराहट"


"मुस्कुराहट" a beautiful poem in hindi
"मुस्कुराहट" a beautiful poem in hindi

तभी तो मुस्कुराहट पहचान लाती है
कभी तीखी मुस्कुराहट किसी के षडयंत्र का और किसी के बहरूपिया होने का ढोंग बताती है
कभी सीधी मुस्कुराहट तकलीफ में उलझा हुआ है यह मन
यह जताती है

कभी टेढ़ी-मेढ़ी मुस्कुराहट किसी की याद में या फिर कोई बात समझ ना आए और खोए हैं यह समझाती है
कभी आधी अधूरी मुस्कुराहट चिंता में है
यह दिखलाती है

कभी हद से ज्यादा मुस्कुराहट किसी होने वाली आशंका या डर को छुपाती है
कभी बिना वजह की मुस्कुराहट छोड़ दो मुझे अकेला चाहिए सन्नाटा यह चाहती है
"नजर"

क्यों मुझसे तुम इतनी रंजिशें  निभा रहे हो
क्यों मुझसे मोहब्बत की जगह नफरत जता रहे हो

क्यों तुम्हें हर पल मुझ में भीग जाने का मन करता है
क्यों मुझे पाने का तुम्हारा यह मन जतन करता है

अक्सर  खाली राहों में नजरें टिकाए रखने से नजरे थक जाती है
काला धब्बा नहीं काला टीका लगा है हमारी मोहब्बत को वरना मोहब्बत में भी नजर लग जाती है





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