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पिंजरा a poem in hindi

"पिजरा"


पिंजरा a poem in hindi
पिंजरा a poem in hindi

पिंजरे की चिड़िया को खुला छोड़ उसे आसमान में  चहकने  दो
बहुत संभाल लिया इस मन को अब इस मन को बहकने दो

आज इन अल्फाजों से सैलाब को आने दो
आज खुद को भूल जाओ और मुझे खुद में खो जाने दो

नशीली आंखों के तुम कायल हो जाओगे
मत करो तुम इतना इश्क मुझसे वरना इश्क में तुम घायल हो जाओगे

बरसों से प्यासी दिल की जमीन की प्यास कैसे बुलाओगे
क्यों जाने दूं तुम्हें क्या जाने के बाद फिर तुम लौट आओगे

बेकरारी इश्क -ए- जुनून अक्सर हाले दिल पर वार करती है
अक्सर दिलों की सरहदों से ना डर कर उसे पार करती है



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