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"आजाद" कविता हिंदी में

"आजाद"


"आजाद" कविता हिंदी में
"आजाद" कविता हिंदी में 

बस मुझे मेरे ख्वाबों के सफर में अकेला कर देना बदले में मेरी खुशियों को अपनी झोली में भर देना
क्यों जिल्लतो को मेरे नाम करते हो
क्यों मुझे बदनाम करते हो
मैं अक्सर अपने आंसुओं को अपनी मुस्कान के पीछे छुपाती हूं
इतना कुछ करने के बाद भी क्यों मैं सिर्फ जरा सा पाती हूं
फिर भी खुद गम के साए में रहकर दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाती हूँ
अक्सर मेरा दिल टूट जाता है
लाख परवाह और समझने के बाद भी कोई ना कोई मुझसे रूठ जाता है
तिनके की तरह बिखर चुकी हूं मैं
 हर पल हर लमहे को भूल चुकी हूं मैं
घुट घुट के मर चुकी हूं मैं
खुद  आजाद हो ना सकी  लेकिन अपनी रूह को आजाद कर चुकी हूं मैं
अब आसमान में उड़ते उड़ते अपने पंख जमीन पर रख चुकी हूं मैं
इस दर्द से मिलेगी राहत इस आस को रखते रखते थक चुकी हूं मैं





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