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"आत्मा का बदला" भाग-2 Horror story in hindi

"आत्मा का बदला" भाग-2


"आत्मा का बदला" भाग-2 Horror story in hindi
"आत्मा का बदला" भाग-2 Horror story in hindi

पिछले भाग में हमने यह जाना था की सेठ बंसी के पीछे कोई कुमार नाम का प्रेत उन्हें परेशान कर रहा है और आइए जाने इसका दूसरा भाग-
शीर्षक आत्मा का बदला
सेठ बंसी इतना कहते हुए भाग पड़े सेठ बंसी भागते-भागते हांफने  लग गए थे। उनके पैर एक झोपड़ी के वहां रुक गए उन्होंने तेजी से उस झोपड़ी के दरवाजे को खटखटाया और चिल्लाते हुए कहा "दरवाजा खोलिए, दरवाजा खोलिए, वो मुझे मार देगा।"
 लेकिन उस झोपड़ी से एक आवाज नहीं आई

 सेठ बंसी ने जब उस झोपडी के दाहिनी और  खिड़की पर एक जोरदार हाथ मारा तो वह घास फूस से बनी हुई खिड़की में एक छोटा सा छेद सा हो गया। उस   लेकिन उस घर में से एक रोशनी सी लग रही थी। तभी उस झोपड़ी के दरवाजे की ओर से एक लड़की की चीखने की आवाज आए "आआआआआ।"
इसे सुन सेठ बंसी सहम से गए। सेठ बंसी पसीना पसीना हो चुके थे। जब सेठ बंसी ने फिर से जब उस छेद वाली खिड़की में देखा तो सेठ बंसी के मुंह से निकल रहे शब्द और उनकी सांसें दोनों कुछ पलों के लिए ठहर सी गई थी।

सेठ बंसी इस तरह से होश में आए जैसे मानो किसी ने उन्हें नींद से उठाया हो क्योंकि उस झोपड़ी के अंदर एक 20-22 वर्ष लड़की थी। इसके आसपास ढेर सारा खून था और वह लड़की काफी देर तक रोती रही। अचानक वह लड़की खड़ी हुई और तभी अचानक से दरवाजे पर धड़ाम से आवाज आई और वह आवाज लगातार आने लगी। जिसे सुन सेठ बंसी उस खिड़की से हटे और दरवाजे की ओर गए तभी सामने की ओर सेठ बंसी की नजर गई। कुछ दूरी पर अंधरे वाली जगह पर हल्की सफेद रोशनी में एक वृद्ध महिला का साया दिख रहा था और  वृद्ध  महिला हाथ हिला के सेठ बंसी को बुलाने का इशारा कर रही थी। अचानक कुत्तों  की रोने की आवाज आने लगी। बैलगाड़ी का पड़ा लोहे का चक्का अपने आप में हिलने लगा। सेठ बंसी इन सब से परेशान हो चुके थे। उधर दूसरी ओर वृद्ध महिला जोरो से अपना हाथ हिलाने लगी और अपने हाथों से इशारे कर सेठ बंसी को अपने पास बुलाने लगी। सेठ बंसी सिर्फ चिल्लाते रह गए "कौन हो कौन हो क्या काम है तुम्हें?" आखिर परेशान होकर सेठ बंसी ने गुस्साए होकर अपने कदम आखिरकार उस साय की तरफ आगे बढ़ा दिए। जैसे ही सेठ बंसी ने दो-तीन कदम आगे बढ़ाए होंगे कि वह लोहे का चक्का जोरो से फड़फड़ाने लगा। अचानक से मानो  सेठ बंसी के कपड़ों में अचानक से पीछे से खिंचाव आया लेकिन जैसे ही सेठ बंसी ने पीछे मुड़कर देखा तो कोई नहीं था। थोड़ा अजीब सा था हर थोड़ी  देर में लेकिन बार-बार उसके कपड़ों में वह खिंचाव हो रहा था। लेकिन जब वह पीछे देखते  तो कोई नहीं होता था। यह देखकर सेठ बंसी पूरी तरह से हक्का बक्का हो चुके थे जैसे ही सेठ बंसी उस वृद्ध महिला के साये  के करीब जा रहे थे तभी किसी ने पीछे से उनका हाथ पकड़ लिया। जब सेठ बंसी ने पीछे मुड़कर देखा तो एक वृद्ध पुरुष वहां खड़ा था एक कपकपा आती आवाज से उस वृद्ध ने कहा  "कहां जा रहे हो?"
यह सुनकर सेठ बंसी ने सामने की ओर इशारा करते हुए  कहा "यह वृद्ध महिला मुझे बार बार बुला रही है। इसीलिए वहां जा रहा हूं।"  यह सुनकर उस वृद्ध ने कहा
"मत जाओ, उस तरफ क्योंकि जो भी वहां जाता है लौट कर कभी नहीं आता है। उस और एक कब्रिस्तान है।"

 कौन थी वह वृद्ध महिला और कौन थी वह रोती हुई लड़की यह  सब जानेंगे। इसकी आने वाले भाग में। अगर आपको यह कहानी पसंद आए तो अवश्य इसे शेयर और कमेंट कीजिए।

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