.

"आत्मा का बदला" भाग-1 Horror story in hindi

"आत्मा का बदला" भाग-1


"आत्मा का बदला" भाग-1 Horror story in hindi
"आत्मा का बदला" भाग-1 Horror story in hindi

नमस्कार स्वागत है आपका "www.storytreasurehunt.in" में
यह कहानी हमें भेजी है हमारे मित्र "श्री जय जेतवानी जी" ने।
रात के अंधेरे में अचानक से  घर  का दरवाजा धड़ाम की आवाज से बंद दरवाजा ना जाने अचानक से खुल गया कदमों की चलने की आवाज आने लगी। दरवाजे की दहलीज से होती हुई एक अजीब सी परछाई नजर आ रही थी। तभी कपकपाते हुए हाथों के साथ सेठ बंसी ने अपने घर का दरवाजा तेजी से  पकड़ा और बंद कर दिया तो अचानक से दरवाजे को जोर से पीटने की आवाज आने लग गई। सेठ बंसी की सारी हिम्मत जवाब दे चुकी थी।
सेठ बंसी भागते हुए अपने कमरे में गए और अपने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया सवेरे देरी से उठे और दुकान का किवाड़ खोला तो हक्का-बक्का रह गए। पूरी दुकान अस्त-व्यस्त हो रखी थी। सारा सामान बिखरा हुआ था। सेठ बंसी अपनी इस  रोजमर्रा के इस हादसे से परेशान हो चुके थे।

सेठ बंसी गुस्से से बिलबिला उठे और रोज रोज हो रहे थे। इन नुकसानों का सेठ बंसी के पास कोई जवाब नहीं था। सेठ बंसी रात में जब घर की ओर रवाना हुए तभी चलते-चलते अचानक से वही कदमों की आवाज आने लगी मानो पीछे पीछे कोई चल रहा हो। सेठ बंसी का शरीर कपकपा रहा था। गर्दन अपने आप दाई और मूड रही थी सेठ बंसी घबराहट के चलते कदमों में रफ्तार बढ़ा चुके थे। लेकिन अचानक से पांव भारी होने लग गए थे सन्नाटे में किसी की मौजूदगी का होने का एहसास हो रहा था मुंह का निचला जबड़ा सख्त हो गया था। मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे। थोड़ी दूर एक जोर की आंधी आई सेठ बंसी अचानक से एक पेड़ से जा टकराए। अचानक से वह पेड़ और हाथों में खून देखकर वह डर गए। तभी एक भयंकर सांसो की ऊँकार की आवाज आने लग गई।

आखिरकार सेठ बंसी ने रोते हुए कहा
 "कौन है जो मुझे परेशान कर रहा है?"
तभी अचानक से भारी  आवाज आई "कुमार।"
यह सुनकर सेठ जी के रोंगटे खड़े हो गए उन्होंने हक लाते हुए कहा "नही! तुम तो मर गए थे"


नमस्कार आखिर कौन था यह कुमार और आखिर क्यों वह सेठ बंसी को परेशान कर रहा था? यह सब जानेंगे हम इस कहानी के अगले भाग में पसंद आने पर यह कहानी को कमेंट और शेयर अवश्य कीजिएगा।



इस कहानी का ऑडियो वर्जन यहां से डाउनलोड करें:-

Download audio story




Direct download link:-                   



Post a comment

0 Comments