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"वह कमरे का आखिरी कोना" horror poem in hindi

"वह कमरे का आखिरी कोना"


"वह कमरे का आखिरी कोना" horror poem in hindi
"वह कमरे का आखिरी कोना" horror poem in hindi

किचन के दरवाजे का हुक लगा होने के बावजूद भी वह आगे की ओर खिसक जाता है
जैसे ही भरता हूं पानी का गिलास रखता हूं उसे आगे तो वह भी पीछे की और सिरक जाता है
उस कमरे के दरवाजे पर लगी काली सिरमाय पर  बल्ब की रोशनी पर सफेद परछाई नजर आती है उसी वक्त बाहर से कुत्तों के होने की रोने और भोकने की आवाज आती है
रात को अचानक से शरीर अकड़ने लग जाता है
जैसे ही अकड़न खत्म होती है उठता हूं तो सामने खिड़की पर लगा पर्दा अपने आप उड़ने लगे जाता है
अजीब ख्वाबों और डरावने सपनों से अक्सर आंखें खुल जाती है
एक अजीब डर में रात में रहता हूं
कब यह रात खत्म होगी यह भगवान से कहता हूं
कभी-कभार रात में दरवाजे पर खटखटाने की आवाज आती है
नहीं जवाब देने पर फिर वह आवाज जोरो से आती है
अंदाज़ जन किचन की खिड़की पर रात में जब पानी के लिए जाता हूं वहां पर खिड़की पर एक लाल परछाई दिखती है
उस तरफ नजर ना जाए इसलिए अक्सर किचन में जाते वक्त नजर नीचे ही होती है
घर के पीछे सुनसान रास्ते पर अक्सर गाड़ी चलते चलते बंद हो जाती है
एक अजीब सी गंद आना शुरू हो जाती है

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