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"अल्फाज" कविता हिंदी में

"अल्फाज"


"अल्फाज" कविता हिंदी में
"अल्फाज" कविता हिंदी में 

तुमने छू लिया है आसमान इसलिए नहीं मैं तुम्हारे पास आया हूं
बस मैं तो तलाश में हूं क्योंकि मुझे भी नहीं पता कि मैं भी आसमान से किसका नाम अपने हथेलियों पर लिख आया हूं
पता नहीं ख्वाबों का क्या है क्या पता जिसके सपने हर रोज देखता हूं उस से रूबरू हो पाऊंगा या नहीं
जो घेरा वह बना चुकी है अपने आसपास उसमें जाऊंगा या नहीं
जरूरी तो नहीं कि हर ख्वाहिश पूरी हो पर कुछ सोचकर गुंजाइश तो कर सकता हूं क्या पता गुंजाइश ना अधूरी हो
जानता हूं जिसके लिए लिख रहा हूं वह यह हरगिज़ नहीं पढ़ेगी
पता नहीं उससे मिलने की कीमत बढ़ बढ़  के कितनी बढ़ेगी
यहां मेरे अल्फाज है कि जो रास्ते में ही अंगड़ाइयां लेने लग जाते हैं
वहीं पर उसके अल्फाज है जो दिलों को सुकून देने लग जाते हैं

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