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"इश्क़" कविता हिंदी में

"इश्क़"


"इश्क़" कविता हिंदी में
"इश्क़" कविता हिंदी में 

चाहने कि तेरी राह में मैं न जाने कहां-कहां भटका
सुकून जाकर जा मिला जो मैं तुझसे आ अटका
तेरे चेहरे पर मैं क्या लिखूं
जो खुद नूर की मूरत है उसे पन्ने पर मैं कैसे दिखूं
तो आ जा मिल तू हर शाम मुझे
इश्क का आराम दूं मैं तुझे
हर मोड़ पर बस तू मिले
हर शाम हो हर रंगीन बस तू हर वक्त मुझे देखकर तू फूलों की पंखुड़ियों की तरह खिले
हर बे जोड़ दर्द का बस तू ही तो एक मरहम है
बस एक इश्क ही सच्चा है बाकी सब कुछ तो भ्रम है
यह मोह जाल कैसा है यह
इश्क में हाल कैसा है यह
क्या है कि हर कोई सिर्फ तुझे चाहे
लेकिन दरिया की तरह तू साहिल को ही पाहे
तुझ से ही तो सब सीखा है
तेरे बिना जीवन का हर क्षण फीका है
किसी और को क्या तेरी मिसाल दूं
तेरी खूबसूरती को शब्दों में कैसे ढाल दूं
तेरी मीठी बोली ने मैं कायल हो गया
बिन छुए तेरी कजरा के तेरे नजरों से मैं घायल हो गया



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