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"मुखोटा" जिन्दगी की सत्यता पर आधारित कविता हिंदी में

"मुखोटा"


"मुखोटा" जिन्दगी  की सत्यता पर आधारित कविता हिंदी में
"मुखोटा" जिन्दगी  की सत्यता पर आधारित कविता हिंदी में 

चंद आंसू बह गए
उसे छुपाने के लिए झूठी मुस्कुराहट के मुखोटे रह गए

जिसको जैसी रूप चाहिए उसके सामने उस रूप की  पहचान बना दी
कोई देख ना ले अपनी असली सूरत इसलिए मुखोटे की चेहरे पर जंजीर बना दी
चार कड़वी लफ्ज़ किसी ने सुना दिया तो बस अभिमान और घमंड की दीवार बना दी

आज कोई मिलने आता है उसके हिसाब से हर किस्म के मुखोटे तैयार है
चेहरे पर झूठी मुस्कुराहट और एक हाथ में गुलदस्ता तो दूसरे हाथ में भी तलवार है

आज मानो लगता है उन मुखोटों के पीछे क्या चेहरा होगा
या क्या पता इन चमकदार रोशनी दार मुखोटों के पीछे अंधेरा होगा

अंदर से खाली और खोकला हूं मैं
बस इन मुखोटों के पीछे दर्द और तन्हाई को सोख लेता हूं मैं

क्या इन बिना मुखोटों के क्या मैं जी पाऊंगा
क्या इन दर्द के कड़वे घुट को पी पाऊंगा

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