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"गरीब का हाथ" कहानी हिंदी में

"गरीब का हाथ"


"गरीब का हाथ" कहानी हिंदी में
"गरीब का हाथ" कहानी हिंदी में


घर में रौनक से आ गई थी बहुत दिनों बाद मौसा के दो बच्चे घर पर आए थे। लेकिन दिवेश के पास वक्त ही नहीं था। ढेरों ऑफिस के काम और प्रेजेंटेशंस बनाने का सारा जिम्मा दिनेश के पास ही था।
गुड़िया इतनी बड़ी थी कि मोबाइल उसके हाथ में था और ईयर फोन कानों में था। जैसे ही वह घर पर आई उसने एक कोना पकड़ लिया और वह गाने सुनने और मोबाइल देखने लग गई थी।
अब बचा था रोनी उसने जैसे देखा कि दिवेश भैया कुछ काम कर रहे हैं तो वह  दौड़कर उनके पास आया और कहां "भैया! क्या यह कंप्यूटर है।"
यह सुन दिवेश ने कहा "नहीं, यह लैपटॉप है।"
 यह सुनकर तभी रोनी ने कहा "अच्छा, तभी इसका सीपीयू नहीं है।"
 यह सुनकर कुछ देर के लिए ही सही माथे पर चिंता की लकीरें हट दिवेश के चेहरे पर मुस्कुराहट आ ही गई। दिवेश ने एक नजर रोनी पर रखी और कहां "अभी कौन सी क्लास में हो।"
रोनी ने फट से जवाब दिया "सेवंथ में हूं भैया!"
 जैसी ही रोनी ने ही लैपटॉप देखा और उसने कहा "भैया जो आप कर रहे हो, वह मैं भी सीख रहा हूं।" दिवेश ने मुस्कुराते हुए कहां "अच्छा, तो तुम्हें क्या क्या आता है, क्या तुम्हें फोटो एडिटिंग  पावर पॉइंट एमएस ऑफिस यह सब आते हैं?"
 यह सुनकर रोनी ने कहा "नहीं, नहीं, भैया अभी इतना सब कुछ नहीं सीखा है। अभी तो यह सब हमारी क्लास में सिखाना शुरु हुआ है।"
सोनी ने फट से लैपटॉप को अपनी तरफ घुमाया और यूं ही कीबोर्ड  की बटन को दबाने लग गया।
 दिवेश ने यह देख कहा "क्या  तुम सही तरीके से कंप्यूटर सीखना चाहते हो।"
 यह सुनकर रोनी ने मुस्कुराते हुए हां में सर हिला दिया। दिवेश ने अपनी सारी फाइलों को बंद कर दी। और रोनी को कंप्यूटर सिखाने बैठ गया। दिवेश को समय का पता ही नहीं चला। तभी अचानक से पिताजी आ गए और उन्होंने कहा "बेटा! अब इन सब काम बंद कर दो, रात की 12:00 बज रही है।"
 दिवेश ने पिताजी की बात सुनकर हां में सर हिला दिया। फिर दिवेश लैपटॉप बंद करने वाला था। लेकिन रोनी की चेहरे पर मुस्कुराहट देख कर दिवेश ने  थोड़ी देर के लिए और रोनी को अपना लैपटॉप दे दिया। सवेरे होते ही दिवेश तेजी से भागते हुए नहाने पर गया और तैयार होकर फटाक से अपना लैपटॉप खोल उसे ऑन किया और काम शुरू करने ही वाला था  कि तभी बाहर से आवाज आई "दूधवाला"
 यह सुनकर मां ने कहां "दिवेश, जरा बाहर से दूध तो ले आना।"
दिवेश ने फटाक से दूध का भगोला  उठाया और वह बाहर दूध लेने चला गया। तभी पीछे से मां ने आवाज लगाई और कहा "भैया, आज 2 किलो देना क्योंकि आज घर में मेहमान आए हैं।"
 यह सुन दूधवाले ने कहा "परंतु आज तो इतवार है उसको देख कर मैं तो  दूध कम लाया हूं।"
 यह सुनकर दिवेश ने कहा "भैया जी देख लीजिए ना, घर में मेहमान आए हैं।"
 यह सुनकर दूधवाले ने मुस्कुराकर साइड में पड़े छोटे से कंटेनर को खोला और उसमें से दूध निकालकर उस भगोले में डाल दिया। यह देखकर दिवेश ने कहा "अगर आप यह 1 किलो हमें दे रहे हैं तो आप को किसी और को देने में कम तो नहीं पड़ जाएगा ना।"
 यह सुनकर दूधवाले ने कहा "कम तो पड़ जाएगा, लेकिन कोई बात नहीं।"
 यह सुनकर दिवेश के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। दूध देने के बाद दूधवाले ने रोजाना की तरह एक ही सवाल पूछा "और कैसे हैं सब" और रोजाना की तरह दिवेश ने सर झुका कर और नजर झुका कर हां में जवाब दिया।
 न जाने दूध वाले को क्या हुआ कि उसने दिवेश के सर पर हाथ रखकर कहां "खुश रहो।" और यह देख उसने पहली बार दूध वाले भैया की शक्ल देखी और दिवेश की आंखों में करुणामय भाव आ गए और उसके चेहरे पर दिखावटी नहीं हकीकत की एक मुस्कुराहट आ गई। दिवेश ने भगोला  हाथ में लिया और जैसे ही जाने लगा तभी पीछे से उस दूधवाले ने कहा "क्या नाम है तुम्हारा बेटा, तुम्हारा नाम बार-बार भूल जाता हूं।"
 यह सुनकर दिवेश ने कहा "दिवेश।"
 दूधवाले ने इस नाम को वापस दोहराया और तेजी से अपनी गाड़ी पर किक मारी और रेस देते हुए आगे चला गया दिवेश वहीं पर खड़ा था और थोड़ी देर बाद मुस्कुराते हुए वह वापस घर के अंदर चला गया।

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