.

वक्त पर कविता | poem on time in hindi

"वक्त"

वक्त पर कविता  | poem on time in hindi
वक्त पर कविता  | poem on time in hindi

क्या वक्त है कि हाथ में कलम तो है लेकिन अल्फाज नहीं है
वो पलकें भीगा देने वाला भावनाओं वाला लिबाज नही हैं
क्या लिखे इन हाथों से उस इश्क की दास्तां वह दास्तां इन हाथों में ही नहीं
जब वह यह कह कर चली गई कि मुझे तुमसे वास्ता ही नहीं
पलकों से मोहब्बत करना हमने सिखाया
किसी इंसान को रब बना कर उसकी इबादत करना हमने सिखाया
लेकिन इस इश्क को आदत बनाना तुमने सिखाया
सही कहा था किसी ने कि मोहब्बत को इतना मजबूरयत मत बनाओ कि वह तुम्हें मजबूर कर दे
किसी से इस तरफ पागलों की तरह भी प्यार मत करो कि वह तुम्हें अपना बना कर फिर तुम्हें खुद से दूर कर दे

Post a Comment

0 Comments