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"मोहोबत" पर कविता हिंदी में

"मोहोबत"

"मोहोबत" पर कविता हिंदी में
"मोहोबत" पर कविता हिंदी में 

रंग बिरंगी नाम की जिंदगी में जब रंगबिरंगा चश्मा उतारा तो घनघोर अंधेरा काला था
चल रहा है अपने साथ हजारों लोगों का झुंड यह तो बस दिल ने वहम पाला था
जिससे बेपनाह मोहब्बत करोगे वह मोहब्बत से लाखों कोस  दूर होगा
क्या पता वह अपनी हालातों से या खुद से अफसोस मजबूर होगा
जब तू जख्मी दिल  होते हुए भी उसे संभाल रहा होगा वह बदला लेने की ताक में तुझमें खंजर डाल रहा होगा
मत कर खुद से वादा की उसे याद ना किए ऐसी कोई शाम आएगी
भूल जा उसकी झूठी मोहब्बत, उसकी झूठी मोहब्बत तेरी ना काम आएगी
करता रहेगा ऐसी मोहब्बत तो तेरी मोहब्बत बेपनाह मोहब्बत के पन्नों में नाम होगी
और ए जालिम मेरी बात मान ले मत खेल मोहब्बत से वरना तू नहीं यह मोहब्बत बदनाम होगी
मोहब्बत में दो जिस्म एक जान होते हैं इसमें जान ली
नहीं जाती
मोहब्बत तो असीम है यूं ही अपना मान गैरों को दी नहीं जाती

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