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"हँसी"- कविता हिंदी में

"हँसी"

"हँसी"- कविता हिंदी में
"हँसी"- कविता हिंदी में 

मेरी झूठी हंसी रखकर उसी याद ना रखना पहचान बन जाता है
और वह अपनी भावनाओं को न बताकर नादान बन जाता हैं
मैं अपने आसपास के लोगों की भीड़ जमा कर उस मे गुम हो जाती हूं
अक्सर तुम्हारे मिलने से मैं मै नहीं तुम हो जाती हूं
उसे नहीं पता है कि लोग अपना काम निकालने के लिए सर पर ज्यादा बिठा देते हैं
और ऐसा कर उसकी मासूमियत का फायदा उठा लेते हैं
उसकी दुनिया अलग और मेरी दुनिया अलग है इस बात को मैं तो मान लेती हूं
उसके लिखे गए अल्फाज मेरे लिए है उसके बिन बताए यह जान लेती हूँ
पता भी नहीं था कि उसे लिखना इतना भा गया
और मुझे भी नहीं पता चला कि कब कहा मेरी जुबान से निकल वह मेरे अल्फाजों में आ गया
मुझे याद है कि किस तरह से वह अपनी बातें मुझे बताता है
कितना बेपनाह प्यार करता है मुझसे यह मुझे जताता है
मैं उसका जन्मदिन अक्सर भूल जाने के दिखावे से वह मायूस हो जाता हैं
और मेरे जन्मदिन पर सबसे पहले उसका सन्देश देख दिल खुश हो जाता हैं

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