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जिंदगी | poem on life in hindi

"जिंदगी"

जिंदगी | poem on life in hindi


जिंदगी अब जी रहें है अब अलग होकर
जानी से कुछ अनजानी शक्ल होकर
बदल रहे हैं लेकिन एक दूसरे को बिना बदल कर
बढ़ रहे हैं कुछ ऐसे जैसे मोहोबत का कत्ल कर
जो बीत जाता हैं वह कहानी बन कर रह जाता हैं
खामौशी और अनशुलझा  सुनामी बन कर रिश्तो के बीच  बह जाता हैं
तुम्हे और जानना हैं
किसी और को नही बस तुमको अपना मानना है
तुम्हे जाने के लिए कैसे कह सकता हूँ
तुम्हारे बगैर कैसे रह सकता हूँ
तू भले किसी से भी प्यार करें इस बात से मेरा प्यार कभी कम नहीं होगा
आँखों का दरिया कभी नम नहीं होगा
सिर्फ तेरी यादों के सहारे रहेंगे
तू आज भी हैं मेरे साथ यह कहेंगे
हर जगह तेरी तलाश रहेंगी
तू आएगी यही आश रहेंगी
होठो पर खामोशी हैं
जिस्म में बस बेहोशी हैं
तू भले किसी से भी प्यार करें इस बात से मेरा प्यार कभी कम नहीं होगा
आँखों का दरिया कभी नम नहीं होगा

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