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लफ्ज़ | poem on word in hindi

"लफ्ज"


लफ्ज़ | poem on word in hindi


आजकल लिखना बस मन का उबाल हो गया हैं
सवेरे नहीं पाता हूं अपने लफ्जों को क्योंकि  लफ्जों का जाल हो गया हैं
मोहब्बत का रास्ता जिसमें  आशिक आखिर तक  जाता ही नहीं हैं
 भला मोहब्बत का शब्द इतना भी भारी नहीं कि तुम्हें  यह शब्द समझ आता ही नहीं है
मान लेते हैं कि दिल है पल पल में न जाने किस पर आ जाता है लेकिन तुम याद जरूर रखना एक राही भले रास्ते में हजारों जगह पनाह ले ले लेकिन उसकी तलब मंजिल तक पहुंचने की होती है
वैसे ही मोहब्बत है करने की चीज है सोचने की नहीं होती है
जिंदगी की आखिरी लम्हों में यह मत सोचना कि काश मिल लेती इसलिए हिम्मत कर मोहब्बत कबूल करने आ जाना
 और कभी लगेगी मिलना भी भूल है तो हमारे खातिर यह भूल करने आ जाना
 वैसे बहुत चुप्पी साध ली है तुमने, भले हमारे साथ लड़ाई झगड़े और शोर कीजिएगा
आखरी तक भले हमारे लिए दिल में कुछ ना हो फिर भी मिलने जरूर आइएगा क्या पता एक मुलाकात दिल में हमारे लिए कोई बेकरारी जगा दे इस बात पर गौर कीजिएगा

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