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जीवन के रंग |story on color of life in hindi

"जीवन के रंग" 
  
जीवन के रंग|story on color of life in hindi

पूरे घर पर शांति का माहौल था तब अचानक  से भागते हुए विकम की माँ आई और रोती बिलखती हुए कहा "एक बहुत ही बुरी खबर है तुम्हारे पिता अब नहीं रहे।" इतना कहते हुए जोरो से रोते-रोते नीचे जमीन पर गिर गई। यह देखकर विकम पूरी तरह से बौखला गया था। उसने सभी घरवालों का आवाज लगाई और सभी को इकट्ठा किया। सभी घरवाले बेचैन हो गए थे। लेकिन  को होश नहीं आ रहा था घबराते हुए घर के एक सदस्य ने कहा "आसपास कहीं से डॉक्टर को ले आओ।"
 यह सुनकर विकम ने कहा"पर घर पर एक पैसा तक नहीं हैं।सारा पैसा पिताजी के इलाज पर लगा दिया।" तो  यह सुनकर सभी के चेहरे की हवाइयां उड़ गई  उन्होंने कहा "आखिर पूरा पैसा लगाने की क्या जरूरत थी जब पता था कि वे नहीं बचेगें ,पहले ही कारोबार बंद हो चुका हैं ,कर्जा सर तक आ गया हैं।"
 इस  जवाब ने विकम को अंदर तक हिला दिया। विकम ने तेजी  से अपनी गाड़ी निकाली और पूरी रफ्तार के साथ रेस देते हुए गाड़ी को भगा दिया सुमित के मन में बार-बार यही आ रहा था "डॉक्टर साहब का तो क्लीनिक है। पर अगर अस्पताल में माँ को भती का कहा तो क्या होगा पहले ही घर की हालात खराब हैं।" फिर विकम के मन में यह आया कि "वह पिताजी के इतने अच्छी मित्र है और इस गंभीर अवस्था में जरूर आ ही जाएंगे।" इधर विकम के फोन पर बार-बार घरवालों के फोन आ रहे थे। विकम का सारा ध्यान डॉक्टर साहब के क्लीनिक पर पहुंचने का था कि तभी रास्ते से पीछे से होरन की आवाज आई। इसे देखकर विकम ने अपनी गाड़ी धीमी करते हुए साइड में रोका तो उसने देखा कि स्कूल के सर मनोज सर आ रहे थे। मनोज सर ने कहा "कहां जा रहे हो? यह तुम्हारे पिता ने 10,000 रुपये दिए थे तुम्हारी विद्यालय की फीस के लिये थे। क्या हुआ वह नही आये विद्यालय फीस जमा कराने?"
  तभी विकम ने रोते हुए कहा "वो माँ की तबीयत खराब हो गई है। वे बेहोश हो गए हैं। अस्पताल से फोन आया हैं कि पिताजी नहीं रहे,क्या आप वह फीस के पैसे मुझे दे सकते हैं, माँ का ईलाज के लिये रुपए चाहिए।"
 यह सुनकर मनोज सर ने हैरान होते हुए कहां "क्या? परंतु अगर फीस ना भरने से तुम्हारा नाम विद्यालय से हटा सकते हैं।"
 यह बात सुनकर सुमित ने कहा "जी! कोई बात नहीं।"
 मनोज सर ने कहा "ठीक है।" यह कहते हुए पैसे विकम को दे दिए। विकम के दोस्त कमल को यह सब पता चलता हैं तो उसे बहुत बुरा लगा।कमल विकम के घर गया  तो उसे पता चलता हैं कि विकम और उसकी माँ ने यह घर छोड़ दिया हैं। काफी महीनों तक विकम की कोई खबर नहीं आई। होली के दिन विद्यालय में यह खबर आई कि  क्रिकेट टीम के लिये सिलेक्शन के लिये कमेटी मेंबर के सभी लोग आएगे और मैच के लिये टीम भी आएंगे। सभी को इस बात की जैसे ही खबर मिली सभी बच्चो ने विद्यालय के मैदान को घेर लिया टीम का प्रदर्शन बहुत अच्छा था टीम की काफी सारे मेंबर सिलेक्ट हो गए सभी को मैच बहुत ही पसंद आया।
सभी ने टीम मेंबर के साथ होली खेलना शुरू किया। जैसे ही कमल ने गुलाल हाथ में लिया और लगाने के लिए टीम मेंबर के पास गया तो वह देखकर दंग रह गया कि वह मेंबर और कोई नहीं विकम ही था। कमल ने विकम को गले लगा दिया।फिर दोनों भावुक हो गए। कमल ने कहा :-"विकम कहा थे तुम इतने दिन?" विकम ने कहा:-"दोस्त ,यह बीते महीने मेरे जीवन के सबसे बड़े संघर्ष मय रहे। परंतु मां ने मेरा बहुत साथ दिया। मैंने क्रिकेट को अपना लक्ष्य बनाया और इसकी प्रैक्टिस की और आज मां की आशीर्वाद से मेरा सिलेक्शन हो गया अब सारी खुशी और सारे सपने जो हमसे छीन ले गए थे वह सब पूरे हो जाएंगे।" यह सब सुनकर कमल की आंखों से आंसू आ गए और चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई कमल ने धीरे से अपने हाथों में पड़े गुलाल को विक्रम के चेहरे पर लगा दिया। गुलाल लगने के बाद विक्रम के भी चेहरे पर हंसी आ गई और यह हंसी यह बता रही थी कि उसके जीवन में जिन रंगो की तलाश थी वह रंग उसे मिल गए।

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