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वक्त पर कविता हिंदी में

"वक्त"

                                                           वक्त | sad poem on time in hindi

ऐसा  वक्त ना हो  कि हाथ में कलम तो हो
 लेकिन अल्फाज  ना हो
जो पहले तुम थे वो तुम आज ना हो
 क्या लिखे मोहोबतो की दास्ताऐ जब वह इन हाथों में ही ना होगा
इस बात को वही मान पाएगा
 वक्त के बीत जाने का गम वही जान पाएगा
जब वक्त बीत जाऐगा तो वह खुद को नहीं पहचान पाएगा
वक्त के चलते जब अपनों के पास तुम्हारे लिए कोई वास्ता ही नहीं होगा
टूट जाओगे जहाँ वापस लौट जाने के अलावा कोई रास्ता ही ना होगा
 मत हो जाओ इतना सब मे मग्न की तुम्हें सब मजबूर कर दे
किसी से इस तरफ पागलों की तरह भी प्यार मत करो कि वह तुम्हें अपना बना कर फिर तुम्हें खुद से दूर कर दे
दिल में एक प्यास रहती है
जब आंखों में बेचैनी और उदासी रहती है
आज अटकी हुई धड़कन कैसी हैं
 यह खटकती हुई तड़पन कैसी हैं
वक्त के चलते बिखरने के बाद खुद को समेट कैसे पाओगे
जब बेचैनी आंखों में हो उन्हें बंद कर तुम चैन से लेट कैसे पाओगे
तब दिल मे जमा हौसला घट आता हैं
वक्त के चलते जब दूसरों में ही नहीं खुद में ही फासला बढ़ जाता हैं
है किसी से मोहब्बत तो उसकी यादें खलती रहेगी
तुम ही बताओ जब वक्त साथ ना हो वह साथ ना हो तो इस दिल में उसके लिये आग कब तक जलती रहेगी
लंबा दिखने वाला वक्त पल में ही बीत गया आखिर उसका सफर कितना छोटा था
जो दूसरों से नहीं खुद से ही झूठ बोलता रहा वह कितना झूठा था
वक्त के चलते इंसान किसी का मोहताज हो सकता है वक्त के चलते इंसान एक बेजान जिंदा लाश हो सकता है


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