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रवैया कहानी हिंदी में । Story on attitude in hindi

"रवैया"
   रवैया कहानी हिंदी में । Story on attitude in hindi

रविवार की साफ सफाई के वक्त राकेश थोड़ी देर पढ़ाई करने बैठा ही था कि तभी रसोई घर से मां की आवाज आई कि "बेटा जरा यह कुछ राशन का सामान तो लेकर आना।" यह बात सुन राकेश में भारी सांस लेते हुए बेमन से अपने किताबों को बंद कर राशन लेने के लिए निकल गया। थोड़ी दूर जाकर प्रमोद जी की दुकान आ गए थे। वहां राकेश ने अपनी जेब से राशन का पर्चा निकालकर प्रमोद जी को थमा दिया। प्रमोद जी भी आराम से सामान निकाल और उसी का हिसाब लिख रहे थे और इसी बीच हल्का हल्का समय बीच से निकालकर ऊपर पड़े टीवी पर चल रही कार्यक्रम पर भी नजर रख रहे थे। तभी अचानक से बाहर से गाड़ी की हॉर्न की आवाज आई। प्रमोद जी ने उस आवाज को अनसुना कर दिया।लेकिन वह आवाज बार-बार  आती रहीं। यह सुन प्रमोद जी ने तंग आकर अपने हाथ पर पड़ा पर्चा और सामान नीचे रखा और देखा तो एक वृद्ध आदमी  उन्हें अपने पास बुला रहा था। यह देख प्रमोद जी गुस्सा हो गए उन्होंने कहा "अरे समान आपको चाहिए आप आइये।वरना आवाज लगा दीजिये। भला दुकान और काम छोड़ में कियु  आऊं?" यह सुन वह वृद्ध बड़ा निराश हुआ और जैसे तैसे गाड़ी बंद करने लगा। वह स्टैंड लगाने की कोशिश कर रहे थे।परन्तु वह स्टैंड लग रही नहीं रहा था। यह देख राकेश ने समान रखा और बाहर जाने बढ़ा ही था कि प्रमोद जी ने कहा "अरे रहने दो,आना होगा और समान लेना होगा तो खुद आएंगे।'
लेकिन राकेश ने अनसुना करते हुए वह बाहर गया। जब राकेश बाहर गया और जैसे ही वृद्ध ने राकेश को देखा तो उसे तेजी से इशारा कर बुलाने लगा। यह देख तेजी  से वृद्ध के पास गया। राकेश ने देखा कि उनके दाहिने पैर में कुछ तकलीफ थी वह काफी देर से कोशिश कर रहे थे। लेकिन उनके दाहिन पैर में इतनी ताकत नही थी कि वह स्टैंड को तेजी से धकेल कर उसे खड़ा कर सकें। यह देख  राकेश ने अपने पैर से गाड़ी में स्टैंड लगा दिया। तभी वह वृद्ध यह देख बड़ा खुश हुआ और जेब से पर्ची निकाल कर राकेश को थमा दी और कुछ पैसे थमा दिए। दुकान की तरफ इशारा कर बस मुंह से ऐ-ऐ कह रहे थे। यह देख और सुन राकेश समझ गया कि "यह बोल नहीं सकते है।" राकेश  दुकान में वापस गया और यह देख प्रमोद जी ने कहा "क्या हुआ? खुद नहीं आए तुम्हें पर्ची और पैसे दिए हैं। भला तुमने पर्ची और  पैसे लिए ही क्यों?" 
राकेश ने वह पर्ची और पैसे प्रमोद जी को थमा दिए और कहां "जी, आप इस बात पर ध्यान दीजिएगा कि अगर यह वृद्ध कभी भी आपकी दुकान पर आए तो आप बाहर जाकर उनसे पैसे और पर्ची ले लीजिएगा। वह  सीढ़ियां नहीं चढ़ सकते और ना ही सामान के लिए वह आवाज लगा सकते हैं क्योंकि वह चलने और बोलने में असमर्थ है।"
यह सुनकर प्रमोद जी शर्मिंदा हो गए। सामान बहुत अधिक था एवं 100 रुपए कम पड़ रहे थे। यह देख राकेश ने अपने जेब से ₹100 निकाल दे दिए। राकेश समझ गया इतना सारा सामान अकेले नहीं संभाल पाएंगे।  यह देख उस वृद्ध के पास आया और कहां "जी  सारा सामान में अपनी गाड़ी पर रख  मैं चला देता हूं और आप केवल अपनी गाड़ी लेकर आ जाइए।" यह देख वह वृद्ध  बहुत खुश हुआ। राकेश ने सारा सामान उस वृद्ध के घर रख जैसे ही अपनी गाड़ी शुरू करने ही वाला था कि तभी अंदर से एक महिला की आवाज आई " बाबू जी आपको कितनी बार कहा है कि कोई जरूरत नहीं है अब आप को सैर सपाटा करने की। सामान के बहाने आप तो यहां वहां घूमते रहते हैं। आज भी मुझे आपकी वजह से खाना बनाने में देरी हो जाएगी।"
 राकेश ने सोचा "आजकल लोग अपना रवैया इस कदर उखड़ा हुआ बना देते हैं कि उसके सामने वह दूसरों की भावनाओं और तकलीफ  को समझने की कोशिश ही नहीं करता हैं।"
यह सोच राकेश ने गाड़ी शुरू कर वहां से चला गया।

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