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"इतंजार" कविता हिंदी में | Intezaar poem in hindi

"इतंजार"

"इतंजार" कविता हिंदी में | Intezaar poem in hindi
"इतंजार" कविता हिंदी में | Intezaar poem in hindi

उसके प्रेम भरे अल्फाज जब उसने प्रेम पूर्वक मुझे भेजे तो मैंने उसे नजरअंदाज कर दिया क्योंकि मैं इस ताक  में था कि जिसे मैंने प्रेम मेरे अल्फ़ाज़ भेजे हैं उसका जवाब क्यों नहीं आया है
दिल में कुछ बिजली की तारों में मानो ऐसा लगा कि जैसे फिर से करंट पाया है
कि मुझे किसी और ने इंतजार कराया है
 इसलिए इसने मुझे प्रेम भरी अल्फाज भेजे हैं मैंने उसे इंतजार कराया है
उसके प्रेम भरे अल्फ़ाज़ जब पढ़ें तो अक्षु गीले हो गए सोचा कि कोई इस कदर भी प्रेम को दिल में दबाए कोई इतनी मोहब्बत कर सकता है
और कोई इतना खुदगर्ज है कि वक्त की दुहाई देते हुए सिर्फ शिकवे गिले कर सकता है

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