.

हॉन्टेड स्टोर रूम|Story on haunted store room part-1

"हॉन्टेड स्टोर रूम"
हॉन्टेड स्टोर रूम|Story on haunted store room part-1

शरद अपने फ्लैट के गेस्ट रूम के अंदर लगी आराम कुर्सी पर बैठ कर एक उपन्यास पढ़ रहा था उसे पता ही नहीं चला कि उसकी आंख कब लग गई तभी अचानक से घंटी की आवाज आई।
शरद बोखलाते हुए जल्दी से उठा और दरवाजे की ओर बढ़ा और जैसे ही उसने गेट खोला तो सामने श्रद्धा खड़ी थी यह देखकर शरद में नजरों को फेर कर तीखे अंदाज में कहा "मालूम है ना तुम्हे, आज रविवार है देर रात तक ऑफिस का काम किया था और अभी जाकर कुछ वक्त मिला था नींद फरमाने के लिए परंतु आप आ गए लेकिन आज तुम जल्दी कैसे आ गई तुम्हारी तो शिफ्ट पूरी होने में अभी भी 3 घंटे बाकी हैं।"
 श्रद्धा का मिजाज पहले से ही खुशनुमा था श्रद्धा ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए शरद को गले लगा दिया। इस पर शरद ने मुस्कुराते हुए कहा "अरे आज बड़ी खुश लग रही हो।"
 सुनने के बाद श्रद्धा ने कहां "तुम्हें पता है आज हमारी लाइब्रेरी के इंचार्ज ने मेरी 3 साल की रुकी हुई सैलरी भी दे दी और साथ में वह यह शहर छोड़ कर जा रही है इसलिए उसने अपना घर हमें देने का सोचा है और इतना ही नहीं जब मैंने उनसे घर के पेमेंट के बारे में पूछा तो उन्होंने यह कह दिया कि वह घर का पेमेंट बाद में ले लेगी और उन्होंने उस घर किसी पर भी हमें दे दिए हैं यानी कि हम फ्लैट् छोड़ खुद की  घर में शिफ्ट होने जा रहे हैं।"
यह सुनकर शरद ने अचंभित  होते हुए श्रद्धा को देखा और कहां "यह कैसे हो सकता है ,तुम्हारी वह इंचार्ज  तो बड़ी खड़ूस थी?"
यह सुनकर श्रद्धा ने पेपर पढ़ाते हुए कहा "यह देखो इसमें साफ-साफ लिखा है कि उन्होंने यह घर हमारे नाम कर दिया है।बस शर्त यह हैं कि हमे हाफ पेमेंट उन्हें अभी देना होगा।"
यह सुन शरद ने खुशी से कहा ठीक है हम यह फ्लैट बेच देगें ,और मै अपनी कंपनी से पर्सनल लोन ले लूँगा, बाकी हमारी सेविंग हैं यानी हम वह घर  खरीद रहे हैं।"
शरद और श्रद्धा अपने नए मकान को लेकर बहुत खुश थे।
शरद और श्रद्धा जल्दी ही अपने नए वाले घर में शिफ्ट हो गए।
1 दिन श्रद्धा ने शरद को गुस्से में आकर कहा "अपने बेडरूम के पास वाले रूम से परेशान हो चुकी हूं मैंने तुमसे कितनी बार कहा है कि एक तो वह रूम भी लॉक है ऊपर से उस रूम से बहुत ही गंदी बदबू होती है। फ्रिज में खाना पड़े पड़े अपने आप सड़ जाता है।
मैं जिस कमरे में सोती हूं उस कमरे की छत पर एक लकड़ी का छोटा सा दरवाजा है जिसे ऊपर वाले स्टोर रूम में जा सकते हैं उस दरवाजे पर ताला लगा है लेकिन रात को अचानक से उस दरवाजे को खटखटाने की आवाज आती है और पड़ोसियों का कहना हैं कि इस घर मे एक नोकरानी के दो जुड़वाँ बेटियों की किसी ने बेहरमी से हत्या कर दी थी। देखो मैं अब इस धर में अब नहीँ रहूँगी। चलो हम कई और चलते हैं।"
यह सुनकर शरद ने कहा "क्या पागलों वाली बातें कर रही हो इतना बड़ा और इतना अच्छा घर हम तो छोड़ दो, और रही बात गंदगी और बदबू की तो हम बहुत एक बहुत अच्छी मेड रखते हैं जो यह सब को देख लेगी। मेरी नजर में एक अच्छी सी मेड है उसका नाम रूसी है।"
शरद ने रूसी को काम पर रख दिया। कुछ दिन शांति से निकल गए। एक रात जब श्रद्धा ने अचानक से दरवाजा खटखटाने की आवाज आने लगी तभी एक धड़ाम आवाज के साथ ऊपरवाले स्टोर रूम का दरवाजा खुल गया देखकर सुधर गई और वह कमरे से बाहर निकल गई। कमरे के बाहर एक साया श्रद्धा ने देखा उसे देख श्रद्धा की चीख निकल गई। तभी आवाज आई।
"अरे मेम साहब आप डरो मत मैं रूसी हूं पानी पीने आई थी।"
यह सुनने के बाद श्रद्धा ने एक राहत की सांस ली और कहां "रूसी, जल्दी से मेरे कमरे में जाओ। ऊपरवाले स्टोर रूम से आवाज आ रही है और उसका लॉक लगा हुआ गेट भी खुल गया हैं।"
अचानक से श्रद्धा भागती-भागती आई और शरद के सामने आकर रुक गई और हाँफने लग गई। बार-बार उसकी नजरे पीछे की और इशारा कर रही थी। उसने एक लंबी सॉस लेते हुए कहा "वो कमरे के रूफ दरवाजा खुला हुआ है। तो मैंने रूसी को ऊपर  वाले स्टोर रूम भेजा था चेक करने के लिए
यह सुनने के बाद शरद ने कहा "तो इसमें डरने की क्या बात है?"
यह सुनकर श्रद्धा ने चिल्लाते हुए कहां "डरने की बात है शरद, क्योंकि रूसी अब तक स्टोर रूम से नही बाहर आए हैं और अचानक सीढ़ियों पर ऊपर से खून बहने लग गया है।"
यह सुनने के बाद शरद के होश उड़ गए  शरद ने  हिम्मत कर जैसे ही स्टोर रूम में गया तो वह हैरान रह गए। वह फट से नीचे उतर आया और उसने फिर से स्टोर रूम के दरवाजे को बंद कर ताला लगा दिया यह देखकर श्रद्धा हैरान रह गई शरद पसीना पसीना हो चुका था श्रद्धा ने धीमी आवाज में शरद से कहां "क्या हुआ, क्या रूसी सही है ना?"
शरद ने कहां "नहीं, रूसी की मौत हो चुकी है।"
To be continue.....
  

Post a comment

0 Comments