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हॉन्टेड स्टोर रूम कहानी पार्ट-2 । story on haunted store room part-2

"हॉन्टेड स्टोर रूम पार्ट-2"
हॉन्टेड स्टोर रूम कहानी पार्ट-2 । story on haunted store room part-2

"आप से निवेदन हैं कि पहले इस कहानी का पहला भाग पढ़ लीजिये"

यह सुनकर शरद ने कहा "क्या तुम पागल हो चुकी हो, हमने राशि पहले ही जमा रखी है और अगर अभी हम छोड़ते हैं तो हमें वहां की राशि भी छोड़नी पड़ेगी।"
सुनने के बाद श्रद्धा ने कहा "पागल, तुम हो चुके हो इतना सब होने के  बाद भी तुम यहां रुकने की सोच रहे हो।"
यह सुनने के बाद शरद ने गुस्से में कहा "अच्छा, नए घर में जाने का मन किसका था क्या मैं राजी था इस सब के लिए यह सब तुम्हारा मन था तुम्हीं ने मुझे यहां आने के लिए मनाया था और रही बात रूसी की तो यह हादसा हो सकता है स्टोर रूम में अंधेरा था रूसी को अंधेरे में दिखा नहीं होगा अचानक से वह नीचे गिर गई होगी मैंने अच्छी तरह से देखा है नीचे गिरने की वजह से रूसी के सर पर चोट लगी थी और उसके सर से खून बह रहा था।"
यह सुनने के बाद श्रद्धा ने कहा "अच्छा, यह सब ठीक रूसी की बॉडी का क्या करेंगे?"
 यह सुनने के बाद शरद ने अपनी जेब से सिगरेट का पाउच निकाला और उसमें से सिगरेट निकाल कर उसे अपनी होटो पर रखा और कहा "क्या करेंगे  मतलब?  उसकी बॉडी हो हम पीछे गार्डन में दफना देंगे, और सब को यह बोल देंगे कि रूसी हमारे घर से चोरी करके वह यहां से भाग गई।"
शरद ने अपनी पॉकेट में लाइटर तलाशा लेकिन उसका वह लाइटर उसके पॉकेट में नहीं था। शरद ने श्रद्धा से कहा "जरा किचन से माचिस तो लेकर आना।"
श्रद्धा डरी सहमी  किचन में गई। तभी अचानक श्रद्धा की चीख की आवाज जोरो से आई। उसे सुन शरद ने अपनी सिगरेट को अपने हाथों में लिया और उसे फेंक  कर तेजी से भागते हुए किचन में गया। शरद ने किचन में देखा कि श्रद्धा बेहोश जमीन पर पड़ी। शरद ने पानी लिया और श्रद्धा के ऊपर छिड़का। अचानक से श्रद्धा को होश आया। डर के मारे श्रद्धा की आंखें बड़ी और लाल हो गई थी। यह देखकर शरद ने उससे पूछा "क्या हुआ?"
श्रद्धा ने अपने हाथ को उठाया और खिड़की की ओर इशारा करते हुए कहा मैं माचिस लेकर आ रही थी कि तभी मैंने  खिड़की पर एक रोशनी देखी और  और साया रूसी का ही था उसकी हाथ में तुम्हारा लाइटर था। यह सब सुनने के बाद शरद हैरान रह गया उसने श्रद्धा को उठाया और बाहर ले गया तभी अचानक से शरद की नजर जमीन पर पड़ी उसकी सिगरेट पर गई उसने उसको उठाया और कहा "यह सिगरेट जल कैसे रही है? मैंने तो इसको जलाया ही नहीं।"
तभी अचानक से पीछे से एक हल्की सी आहट हुई और किचन का दरवाजा धड़ाम से बंद हो गया जिसे सुन शरद और श्रद्धा के हक्के बक्के श्रद्धा एकदम से उठी उसने शरद का हाथ पकड़ा और कहा "मुझे कुछ नहीं पता हम अभी के अभी इस घर से बाहर निकल रहे हैं मैं आज रात यहां नहीं सोऊंगी।"
 शरद ने श्रद्धा के साथ जाने में ही भलाई समझी वह उठा और  दरवाजा खोल बाहर चला गया। तभी शरद ने कहा "इतनी रात हम कहां जाएंगे तुम रुको मैं अंदर से कार की चाबी और अपना पर्स लेकर आता हूं।"
यह सुनकर श्रद्धा चौक गई उसने कहा नहीं कोई जरूरत नहीं है इस बात पर गुस्सा करते  हुए शरद ने कहा "अरे मैंने कहा ना मैं लेकर अभी आ रहा हूं।" यह कहते हुए शरद घर के अंदर चला गया।
काफी देर हो चुकी थी शरद घर से बाहर नहीं लौटा तभी एक आवाज घर के अंदर से आई "श्रद्धा जरा बेडरूम के पास वाले रूम में तो आना।"
यह सुनकर श्रद्धा हैरान रह गई क्योंकि बेडरूम के पास वाला रूम तो लॉक था यह सोचते हुए श्रद्धा घर में चली गई उसने जैसे ही बेडरूम के पास हो रूम देखा तो वह हक्का-बक्का रह गई क्योंकि बेडरूम के पास रूम का दरवाजा खुला हुआ था अंदर से अचानक से आवाज आई "श्रद्धा"।
आवाज सुनकर श्रद्धा सहम गई उसने धीरे-धीरे उस कमरे में कदम रखें तभी अचानक से रूम के अंदर  बाथरूम से पानी की आवाज आ रही थी श्रद्धा जैसे ही बाथरूम में गई तो उसने देखा कि बाथरूम में कोई नहीं था तभी कमरे के बाहर से आवाज आई "श्रद्धा तुम कहां हो?"
यह सुनकर श्रद्धा ने जैसे ही तेजी से कदम बढ़ाया मानो किसी ने उसकी कदम पकड़ लिए हो और एकाएक बाथटब में जा गिरी। श्रद्धा ने बहुत कोशिश की लेकिन वह उठ नहीं पा रही थी और अचानक से बाथटब में पानी आना शुरू हो गया धीरे धीरे पानी पूरे बाथटब में भर गया। श्रद्धा तड़पने लगी। उसकी सांस रुक गई थी। वह सांस नहीं ले पा रही थी। तभी भागते हुए शरद वहां आया। उसने श्रद्धा को बाथ टब में देखा यह देखकर वह हैरान रह गया। उसने बहुत कोशिश की लेकिन नल से पानी रुक ही नहीं रहा था और ना ही श्रद्धा बाथ टब से बाहर निकल पा रही थी। यह देख कर शरद भागते हुए गेराज में गया। एक भारी पाना वहां से लाया और पागलों की तरह बाथटब पर मारने लगा। काफी देर के बाद बाथटब मैं एक बड़ा सा छेद हो गया और सारा पानी बाहर निकल गया शरद ने हाँफते हुए श्रद्धा को बाथ टब से बाहर निकाला और उसे बाहर पड़े सोफे  पर लिटा दिया। काफी देर तक शरद श्रद्धा के हाथ और पांव को रगड़ता रहा और उसके पेट को दबाता रहा।तभी शरद ने अपने दोनों हाथों से श्रद्धा के सीने को बहुत जोर से दबाया। तभी पेट में जमा पानी श्रद्धा के मुंह से बाहर आया और जोरो से सांसे  लेते हुए श्रद्धा ने अपनी आंख खोल दी।
To be continue...

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