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सच्चा प्यार । story on true love in hindi

"सच्चा प्यार"
       सच्चा प्यार । story on true love in hindi

अचानक से दरवाजा खटखटाने की आवाज आई और एक आवाज आई "अरुण जरा कमरे से बाहर आना तो?"
अचानक यह आवाज सुनने के बाद अरुण हैरानी के साथ एकदम से उठा और उसने आंखों को अपनी ऊगली से सहलाते हुए कहा " क्या हुआ डैड इतनी रात को आप मुझे बुला रहे हैं कुछ काम है क्या?"
यह सुनकर डैड ने मुस्कुराते हुए अरुण को कहा "चलो हम एक लॉन्ग ड्राइव पर चलते हैं।" यह सुनने के बाद अरुण ने बड़ी हैरानी के साथ दीवार पर टंगी गाड़ी को देखा और कहा "डैड इस वक्त।"
यह सुनने के बाद अरुण ने कहां "ओके डैड।"
अरुण के डैड ने गाड़ी निकाली थोड़ी देर बाद डैड ने कहा
  "क्या हुआ अरुण, आज कल तुम बहुत ही सैड लगते  हो?"
यह सुन अरुण ने कहा "सॉरी डैड कुछ फीलिंग और  तकलीफ ऐसी होती है जो इतनी आसानी से बताई नहीं जा सकती है और ना ही वह शेर की जा सकती है। इसलिए मैं अपनी वही फीलिंग शेयर  नहीं कर सकता है।"
यह सुनने के बाद डैड ने कहा "मैं जानता हूं ,तुम ऐसा क्यों कह रहे हो? मुझ में और तुम में एक उम्र का फासला है। इसलिए तुम खुलकर मुझसे बात नहीं कर पाते हो।"
 ये सुनने के बाद अरुण ने कहा "नहीं डैड, ऐसी कोई बात नहीं है। कुछ नहीं बस  जरा सी ऑफिस की टेंशन थी।अभी-अभी केवल 2 साल ही हुए हैं जॉइन हुए।  बढ़ती उम्र इस कदर की टेंशन होना आम बात है।"
यह सुन डैड ने कहा:- "मै इस बात को अच्छी तरह से समझता हूं कि अब तुम बड़े हो चुकी हो। काम का तनाव होता है। परंतु मैं तुम्हारा डैड हूं और मेरे पास बढ़ती हुई उम्र के साथ एक बहुत ही बड़ा तजुर्बा भी है। मैं सिर्फ चेहरा ही नहीं आंखें भी पढ़ लेता हूं अगर तुम्हें कोई परेशानी है तो तुम उससे कह सकते हो।"
यह सुनने के बाद अरुण के आंखों से आंसू आ गए।
अपने आंसुओं को साफ करते हुए अरुण ने कहा "डैड दरअसल यह सुनने के बाद मुझे नहीं लगता है कि आप यह समझेंगे कि मैं भी किन भावनाओं को लेकर बैठ गया हूँ। दरअसल मैं किसी से प्यार करता था। कॉलेज टाइम से हमारी बॉन्डिंग बहुत अच्छी थी। लेकिन जैसे ही कॉलेज खत्म हुआ तो हम दोनों के रास्ते अलग हो गए। वह मुझे बस एक केवल अच्छा दोस्त ही समझती थी। लेकिन मैं उससे बहुत प्यार करता था। मैं उस वक्त का इंतजार  कर रहा था कि जब मैं उससे अपने प्यार का इजहार कर पाऊं। लेकिन मैं इस दोस्ती के दायरे को तोड़ना नहीं चाहता था। इसीलिए मैंने अपनी भावनाओं को दबा कर रखा और उस वक्त का इंतजार किया जब ये भावनाएं उसके भी मन में उमड़ आए। जब मैं उसेे अपनी भावनाएंं बताने वाला था तब मुझे पता चला कि वह किसी और से प्यार करती हैं।"
 यह सुन डैड ने गाड़ी का शीशा नीचे किया और अंगुली से इशारा करते हुए कहा "यह क्या है?"
 अरुण ने देखा और कहा "यह तो बस रोड लाइट है।" डैड ने कहा "अरुण, लेकिन तुम मेरी नजर से देखो यो एक रोशनी है जो अंधकार को मिटा रही है। एक नई उर्जा मन में पैदा कर रही है। देखा, हर किसी का नजरिया सोचने का तरीका अलग अलग होता है। कभी कबार हम जिससे प्यार करते हैं। क्या पता उसके लिए यह सब एक अच्छा खुशनुमा वक्त हो? तुम्हें यह समझना पड़ेगा कि जैसी हमें प्यार करने की आजादी है वैसे ही दूसरों को भी किसी और से प्यार करने की आजादी है।"
यह सुनने के बाद निराश होते हुए अरुण ने कहा "मुझे लगा था कि आप मेरी भावनाओं को नहीं समझ पाएंगे। मैं उससे प्यार करता था और वह मेरा 3 साल का प्यार है और उससे मैंने गवा दिया।"
यह सुनने के बाद डैड ने कहा "अरुण, मैं तब छोटा था तो मैंने मेरे माता पिता खो दिया। उस वक्त एक गुमचुप बच्चा बन गया था। जैसे ही मैं बड़ा हुआ। तब मुझे कोई ऐसा मिला। जो मुझे मेरे गम से बाहर निकालने में उसने बहुत मदद करी। मुझे उस से प्यार हो गया। दरअसल मैं जिससे प्यार करता था। वह भी बेइंतहा प्यार करती थी।पर एक कार एक्सीडेंट में उसकी मौत हो गई।मैने अपना 20 साल का प्यार खोज दिया था।
मैं पूरी तरह से टूट गया था। उस वक्त मैं अंतरा से मिला उसने मुझे सँभाला और वह मेरी जीवनसाथी बन गई। लेकिन मैने यह साफ बता दिया था कि जिस हद तक प्यार जो मैने किसी और को करा हैं। वही हद तक प्यार में किसी और को नहीं दे सकता हूँ। अंतरा ने मेरी बात मान ली। उसका भी यही मानना था कि जब किसी को आजादी देते हैं तो वह प्यार करता हैं लेकिन जिसे बाँध दिया जाता हैं। वह कभी प्यार नहीं कर सकता हैं। प्यार तो अमूल्य हैं। वह तो सभी भावनाओ से परे हैं।वह निस्वार्थ और निभाव से करना चाहिए। फिर वापस जिस से प्यार करे। वह हम से प्यार करे या नहीं।आज अंतरा मेरे साथ नही हैं। लेकिन मैं उसे आज भी प्यार करता हूं।"
इतना कहते हुए डैड के आँखों से आँसू आ गए। अरुण समझ गया कि उसके पिता उसे क्या समझाना चाहते थे?
अरुण बहुत खुश था उसके भी आँखों से आँसू आ गए।आखिर कार वह प्रेम क्या होता हैं? यह समझ गया। वह आज खुश था कि  आज उस को एक मौका मिला अपने पिता को जानने के लिये। अरुण के पिता भी खुश थे कि बहुत दिनों बात अरुण के चेहरे पर गम नही खुशी झलक रही थी।

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