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दोस्ती पर कविता । poem on friendship in hindi

"दोस्ती"
दोस्ती पर कविता । poem on friendship in hindi

वो जो सिंगल रहने के ज्ञान देता फिरता था बस वह तो कहने की बात हैं
हम तो आज भी उसके कहने पर सिंगल रह गए लेकिन वह तो आज एक गर्लफ्रैंड के साथ हैं
अगर मुसीबत ताला हैं तो दोस्त चाबी हैं
कर लो बात तो उनके लिये फिर वह लड़की नही उनकी लिये भाभी हैं
वो कॉलेज ट्रिप में चादर ओढ़ कर करी पिटाई
तो कभी मजाक मस्ती के साथ कर करी लड़ाई
वो साथ बैठ कर मैग्गी खाना
वो साथ कही धूमने जाना
छोड़ो दुनिया क्या सोचती हैं
अगर की हैं तो निभानी दोस्ती हैं
कभी किसी की चीज लेकर उसको भगाना
उसके ही बर्थडे पर पूरा केक उसको लगाना
फिर तो दोस्तो के बिन बस मोबाइल पर बाते होगी
काम की टेंशन का दिन और काली सूनी राते होगी
बढेगे जिंदगी के सफर में तो बस फिर मुकाम और मंजिल पहले फिर सब बाद होगा
लेकिन फिर सभी को यह कॉलेज के दिन याद होंगा
जिम्मेदारी का बादल ले बरसना होगा
ना मिल पाएंगे बस यूंही तरसना होगा
हो सकता हैं किसी को जाना पड़े कही दूर तो उसे इस दोस्ती के सपनो को हटा कर जागना होगा
जिंदगी तो एक रेस हैं सब भूल भागना होगा
फिर तस्वीरे और वीडियो ही कह जाएंगे
वाकई यह जीवन तो एक दरिया हैं यह दिन यह लम्हे भी बस बह जाएंगे

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