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दादी माँ कविता हिंदी में । poem on grandmother in hindi

"दादी माँ"
                      दादी माँ कविता हिंदी में । poem on grandmother in hindi

वो एक नही दो बच्चों की माँ हैं
हम अगर पंछी हैं तो वो आसमा हैं
जहाँ उसने एक को दूध पिलाया हैं
तो दूसरे को उसने लोरी और कहानी सुनाकर सुलाया हैं
वो अपने छोटी सी पोटली से एक सिक्का थमाती हैं
कोई डॉट ले उसके पौते को तो वो आकर उसे डॉट लगाती हैं
वक्त की पेडिया हैं
जो एक वक्त पर खुली पंछी थी आज वो पिजरे की कैद एक चिड़िया हैं
जो था एक हसीन चेहरा आज उस पर झुर्रियां हैं
उसने माँ बनकर एक को तो एक को दादी बन पाला हैं
उस एक ने पूरे घर को सँभाला हैं
जिसका हर रास्ता अपनो तक ही जाता हैं
उसकी बाते आज कोई नही सुनना चाहता हैं
आज उसके पास उदासी हैं
आज उस की आँखे प्यासी हैं
जिसे पलकों ओर बिठाना चाहिए उसे कोने में बिठा दिया
जिसे फूलो के बिस्तर पर लिटाना चाहिए उसे एक छोटे से बिस्तर पर लिटा दिया
आज कल टीवी फोन ने सब भुला दिया है
आज अपनो ने ही उसे अनजाने मे ही सही पर उसे रुला दिया है
आज हमारे पास अपने बड़ो के लिये वक्त नहीं तो हम भी तो फिर यही पायेंगे
उम्र सब की बढ़ेगी सब अंत मे अकेले हो जायेगे
वो जब मिलने पर अपने पास बिठा देती हैं
वो अपनी सदियों की प्यास कुछ वक्त के लिये बुझा लेती हैं
सोचो उसने अकेले ही इतना बड़ा सफर काटा होगा
अपने दर्द को किसी और से नहीं बाँटा होगा

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