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तकलीफ कविता हिंदी में । poem on pain in hindi

 "तकलीफ"
तकलीफ कविता हिंदी में । poem on pain in hindi

सिर्फ बाहर से सब के साथ हूँ अंदर से मैं अकेली हूँ
सिर्फ़ बाहर से सब के परेशानी को सुलझाने वाली बात हूँ अंदर से मैं पहेली हूँ
अपने तकलीफ सब छोड दूसरों के तकलीफ़ को दूर करने के लिए मैं सोचती हूँ
 ख़ुद को ढुटने के लिए मैं खोजती हूँ
यह बेजान कमरा सताता हैं
यही हैं मेरे साथी एक वक्त फिर यही कमरा बताता हैं
आँसू साफ कर खडी हो जाती हूं
जिम्मेदारी को देख बड़ी हो जाती हूं
कियु मुझे मुझ से ही दूर किया
कियु मुझे इतना मजबूर  किया
खुद से ही अड़ जाती हूं
खुद से ही लड़ जाती हूं
कुछ रहा हैं पर सच मे रहा ही नहीं हैं
कुछ कहा हैं पर सच मे कहा ही नही हैं
चश्मे में आँसू की छाप होंगी
मेरी आँखों मे कुछ कर गुजरने की आग साफ होगी
जल कर सोना बनने का ताप चाहिए
और छोटी मोटी चीज नहीं दिलों को हिलाने के लिये हौसलो का सैलाब चाहिए
 दुसरो को खुश देखने के लिये हाँ होड़ करती हूं
दुसरो की खुशी के लिये हाँ वक्त के साथ दौड करती हूं
मुझे बता है कि मुझे अकेले ही आगे बढ़ना हैं कोई नहीं सहारा हैं
खुद की खुशी को सोचु दो तू यह किसी को नहीं गवारा हैं
मैं खुद को कही दूर एकांत शांत जगह पर देखना चाहती हूँ
मैं यह दुनिया की बेड़िया को कही दूर फेंकना चाहती हूँ
बीते हुए तेरे संग लम्हे मेरी तड़पन को अक्सर मेरे सामने खड़ा कर लेते हैं
तेरा यू मुझ से बात ना करना मेरे जख्मों को और बड़ा कर लेते हैं
जी भर के ताउम्र तुझे देख कर और तेरी यादों में मेरा हर पल बीत जाएगा
बड़ी खुशी खुशी मै खुद को हारने दूँगी अगर इसके चलते तू जीत जाएगा





 

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